रविवार, 29 जनवरी 2012

मेरा कन्धा

मेरा कन्धा


मेरी बेटी के लिए
दुनिया को देखने का
मुंडेर है मेरा कंधा !

झाँका करती है ,
सिर टिकाये
पीला सूरज,खिलते गुलाब
पंख फड़फड़ाती चिड़िया ,
गुटरगूं करते कबूतर
देखती है यकीन करती है
चूमती है मेरा कंधा !



मेरी बेटी के लिए
दुनियादारी में
उतरने की सीढ़ी है मेरा कंधा !

सच है या झूठ
कैसी है यह दुनिया
सरसों के फूलों में
आर्जीमोन के फूल मिल गये ,
दुविधा के शूल चुभ गये
पर काँटों के खेत में मेड़ है मेरा कंधा !

मेरी बेटी के लिए
प्रेम है आस्था है जिद है ,
और जो कुछ भी है ,
बस इतना समझ लीजिये कि
सच कि दहलीज है मेरा कंधा !

स्वार्थों के जंगल में पगडंडी है ,
लहूलुहान होते बयान करता है ,
कवि का दुःख भोगता है ,
क्योंकि प्रश्नों के मेघ में
क्षितिज है मेरा कन्धा !

मेरी बेटी के लिए
दुनिया को देखने का
मुंडेर है मेरा कंधा ! !

45 टिप्‍पणियां:

  1. हर परिस्थिति में बेटी के लिए सहारा माँ का कन्धा ....हृदयस्पर्शी .. ..

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत धन्यवाद मोनिका जी !

      हटाएं
  2. यह सहारा बहुत होता है, सब बच्चों के लिये, उम्र भर..

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत सुंदर बात कही आपने धन्यवाद !

      हटाएं
  3. किसी का कंधा मिले सहारे के लिए इससे अच्‍छी बात क्‍या है। और अगर वह मां का कंधा हो इससे बड़ी बात क्‍या है। और मां का कंधा बेटी के लिए हो तो फिर कहने ही क्‍या। बहुत जरूरी सहारा है यह।
    *
    इस फोटो में आप और बिटिया बहुत सुंदर नजर आ रही हैं। बधाई एवं शुभकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. राजेश जी ! कितनी अर्थपूर्ण बात कही आपने ! जी हाँ मै और मेरी बेटी है ! उसके लिए आप सबका आशीर्वाद चाहती हूँ ! धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  5. मेरी बेटी के लिए
    प्रेम है आस्था है जिद है ,
    और जो कुछ भी है ,
    बस इतना समझ लीजिये कि
    सच कि दहलीज है मेरा कंधा !
    ....... उसकी उम्र का अवलंब है यह कांधा , एक अनुभव है यह कांधा ... बहुत सारा प्यार आपकी बेटी को

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद रश्मि जी !

      हटाएं
  6. बहुत ही गहन भाव संयोजन
    कल 01/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, कैसे कह दूं उसी शख्‍़स से नफ़रत है मुझे !

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत ख़ुशी हुई सदा जी ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

      हटाएं
  7. मेरी बेटी के लिए
    प्रेम है आस्था है जिद है ,
    और जो कुछ भी है ,
    बस इतना समझ लीजिये कि
    सच कि दहलीज है मेरा कंधा !

    वाह...बेजोड़ रचना...बधाई

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत धन्यवाद नीरज जी !

      हटाएं
  8. बहुत ही सुन्दर भाव हैं . मन को छूती, बेटी को सहलाती बेहद कोमल भाव लिए तुम्हारी कविता की हर पंक्ति मर्मस्पर्शी है .बहुत बहुत बधाई..

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा !

      हटाएं
  9. बहुत अच्छा लगा आपकी यह कविता पढ़ कर!
    छोटी बहन जीवन मे खूब तरक्की करें हमारी यही शुभकामना है।

    सादर
    -----

    जो मेरा मन कहे पर आपका स्वागत है

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद यशवंत माथुर जी !

      हटाएं
  10. बस इतना समझ लीजिये कि
    सच कि दहलीज है मेरा कंधा !

    स्नेहमयी,भावभरी प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  11. हर बेटी की माँ को जुबां दे दी आपने... बहुत सुन्दर रचना बधाई!!!!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद कल्पना जी !

      हटाएं
  12. बहुत बहुत सुन्दर...
    सच में बेटी की माँ होना और खुद बेटी होना...दोनों मधुर और ज़िम्मेदारी भरे नाते हैं..

    आपकी रचना बहुत भायी..

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

      हटाएं
  13. ma to beti ki saheli ki tarah hi hoti hai..
    khubsurat rachana..

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

      हटाएं
  14. मेरी बेटी के लिए
    दुनिया को देखने का
    मुंडेर है मेरा कंधा ! !

    बहुत सार्थक अंतर्स्पर्शी रचना....

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

      हटाएं
  15. उत्तर
    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद सुषमा जी !

      हटाएं
  16. उषा जी, मेरे शब्द मेरा साथ फिलहाल नहीं दे रहे. अभी तो मैं बस आपकी कविता की खुशबू में डूब उतरा रही हूँ . फिर भी फिलहाल मेरी बधाई स्वीकारें .

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

      हटाएं
  17. बहुत खूबसूरती से लिखा है आपने
    पढ़कर बहुत अच्छा लगा !!

    उत्तर देंहटाएं
  18. अशोक जी सुंदर टिप्पणी के लिए धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत ही सहज और सुरुचिपूर्ण अभिव्यक्ति है, सहेजने लायक...

    उत्तर देंहटाएं
  20. कंधे दो हैं
    और उपयोग कई
    महत्वपूर्ण उपयोग की व्याख्या का तरीका बेहद बेहतरीन
    साधुवाद आपको...
    सहेली
    यशोदा

    उत्तर देंहटाएं
  21. "मेरी बेटी के लिए/ दुनिया को देखने का/ मुंडेर है मेरा कंधा !"
    माँ-बेटी के रिश्ते को परत-दर-परत उकेरती एक नायाब कविता.. बहुत खूब।

    उत्तर देंहटाएं
  22. duniyadari me utrne ke liye isse umda our koun si sidhi ho skti hai . wow usha ji . beti ko bahut sari shubhkamnayen .

    उत्तर देंहटाएं
  23. आदरणीया उषा राय जी बहुत ही खूबसूरत ..प्यारे मनोभाव ..मूल भाव बहुत ही सुन्दर ..सुन्दर सन्देश ..सच में ये कंधा क्या कुछ नहीं देता .माँ की ममता का जबाब नहीं
    भ्रमर ५
    भ्रमर का दर्द और दर्पण

    उत्तर देंहटाएं
  24. आपके टोकने के बाद आज एक साल बाद ब्लॉग पर कुछ लिखा है.समय मिले तो हौसला बढाने आयेगा.

    उत्तर देंहटाएं