मेरी बेटी के लिए
दुनिया को देखने का
मुंडेर है मेरा कंधा !
झाँका करती है ,
सिर टिकाये
पीला सूरज,खिलते गुलाब
पंख फड़फड़ाती चिड़िया ,
गुटरगूं करते कबूतर
देखती है यकीन करती है
चूमती है मेरा कंधा !
मेरी बेटी के लिए
दुनियादारी में
उतरने की सीढ़ी है मेरा कंधा !
सच है या झूठ
कैसी है यह दुनिया
सरसों के फूलों में
आर्जीमोन के फूल मिल गये ,
दुविधा के शूल चुभ गये
पर काँटों के खेत में मेड़ है मेरा कंधा !
मेरी बेटी के लिए
प्रेम है आस्था है जिद है ,
और जो कुछ भी है ,
बस इतना समझ लीजिये कि
सच कि दहलीज है मेरा कंधा !
स्वार्थों के जंगल में पगडंडी है ,
लहूलुहान होते बयान करता है ,
कवि का दुःख भोगता है ,
क्योंकि प्रश्नों के मेघ में
क्षितिज है मेरा कन्धा !
मेरी बेटी के लिए
दुनिया को देखने का
मुंडेर है मेरा कंधा ! !
हर परिस्थिति में बेटी के लिए सहारा माँ का कन्धा ....हृदयस्पर्शी .. ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद मोनिका जी !
हटाएंयह सहारा बहुत होता है, सब बच्चों के लिये, उम्र भर..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुंदर बात कही आपने धन्यवाद !
हटाएंकिसी का कंधा मिले सहारे के लिए इससे अच्छी बात क्या है। और अगर वह मां का कंधा हो इससे बड़ी बात क्या है। और मां का कंधा बेटी के लिए हो तो फिर कहने ही क्या। बहुत जरूरी सहारा है यह।
प्रत्युत्तर देंहटाएं*
इस फोटो में आप और बिटिया बहुत सुंदर नजर आ रही हैं। बधाई एवं शुभकामनाएं।
राजेश जी ! कितनी अर्थपूर्ण बात कही आपने ! जी हाँ मै और मेरी बेटी है ! उसके लिए आप सबका आशीर्वाद चाहती हूँ ! धन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंमेरी बेटी के लिए
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रेम है आस्था है जिद है ,
और जो कुछ भी है ,
बस इतना समझ लीजिये कि
सच कि दहलीज है मेरा कंधा !
....... उसकी उम्र का अवलंब है यह कांधा , एक अनुभव है यह कांधा ... बहुत सारा प्यार आपकी बेटी को
आपका बहुत बहुत धन्यवाद रश्मि जी !
हटाएंबहुत ही गहन भाव संयोजन
प्रत्युत्तर देंहटाएंकल 01/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है, कैसे कह दूं उसी शख़्स से नफ़रत है मुझे !
बहुत ख़ुशी हुई सदा जी ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
हटाएंमेरी बेटी के लिए
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रेम है आस्था है जिद है ,
और जो कुछ भी है ,
बस इतना समझ लीजिये कि
सच कि दहलीज है मेरा कंधा !
वाह...बेजोड़ रचना...बधाई
नीरज
बहुत बहुत धन्यवाद नीरज जी !
हटाएंबहुत ही सुन्दर भाव हैं . मन को छूती, बेटी को सहलाती बेहद कोमल भाव लिए तुम्हारी कविता की हर पंक्ति मर्मस्पर्शी है .बहुत बहुत बधाई..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा !
हटाएंबहुत अच्छा लगा आपकी यह कविता पढ़ कर!
प्रत्युत्तर देंहटाएंछोटी बहन जीवन मे खूब तरक्की करें हमारी यही शुभकामना है।
सादर
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जो मेरा मन कहे पर आपका स्वागत है
आपका बहुत बहुत धन्यवाद यशवंत माथुर जी !
हटाएंबस इतना समझ लीजिये कि
प्रत्युत्तर देंहटाएंसच कि दहलीज है मेरा कंधा !
स्नेहमयी,भावभरी प्रस्तुति।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
हटाएंहर बेटी की माँ को जुबां दे दी आपने... बहुत सुन्दर रचना बधाई!!!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपका बहुत बहुत धन्यवाद कल्पना जी !
हटाएंबहुत बहुत सुन्दर...
प्रत्युत्तर देंहटाएंसच में बेटी की माँ होना और खुद बेटी होना...दोनों मधुर और ज़िम्मेदारी भरे नाते हैं..
आपकी रचना बहुत भायी..
इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
हटाएंma to beti ki saheli ki tarah hi hoti hai..
प्रत्युत्तर देंहटाएंkhubsurat rachana..
इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
हटाएंमेरी बेटी के लिए
प्रत्युत्तर देंहटाएंदुनिया को देखने का
मुंडेर है मेरा कंधा ! !
बहुत सार्थक अंतर्स्पर्शी रचना....
इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
हटाएंप्रभावशाली प्रस्तुती....
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपका बहुत बहुत धन्यवाद सुषमा जी !
हटाएंउषा जी, मेरे शब्द मेरा साथ फिलहाल नहीं दे रहे. अभी तो मैं बस आपकी कविता की खुशबू में डूब उतरा रही हूँ . फिर भी फिलहाल मेरी बधाई स्वीकारें .
प्रत्युत्तर देंहटाएंइस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
हटाएंबहुत खूबसूरती से लिखा है आपने
प्रत्युत्तर देंहटाएंपढ़कर बहुत अच्छा लगा !!
अशोक जी सुंदर टिप्पणी के लिए धन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत ही सहज और सुरुचिपूर्ण अभिव्यक्ति है, सहेजने लायक...
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