कच्ची तोड़ सुखाई यादें
शाम के रंग रंगी उदास यादें ,
राह चलते पुल पेड़ मकान नदी ,के संग छूटती ओझल होती यादें !
गिलहरी की पूंछ सी फिसलती यादें !
उड़ते पंखों वाली खुशियों की यादें !
बेमुरौवत दिल को दुखाती यादें !
इन सबको बहुत भुलाया ,
पर भूली नही दिल पर ,
सिल की तरह जमीं,
बैठी यादें !