शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

संकल्प

जरुरत के पास
समय और सीमा होती है ,
पर लड़ाई के पास नहीं !!!

जब जिन्दगी की राह
हक और लड़ाई
से होकर गुजरती है
तो वह सिर्फ बहाव नही ,
धारा होती है... वेगवती
हिमस्फुलिंग उछालती !!!

और धारा कभी रूकती नहीं
बहा ले जाती बाधाओं को
तोड़ देती है चट्टानों को ,
उसे चाहिए अपना
संकल्प ! सत्य संकल्प !!

ये धारा अमर है ,
आइना दिखाती रहेगी ,
युगों युगों तक
कालिख में डूबी
कलुषित आत्माओं को !!!

कुछ सत्य संकल्पों के साथ आप सबको दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं !

13 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर पंक्तियाँ, दीवाली की शुभकामनायें।

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  2. यथार्थवादी पंक्तियाँ.दिवाली की आपको भी ढेरों शुभकामनाये.

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  3. एक मुक्कमल कविता आई है आपकी ओर से ! दीपावली की हार्दिक शुभकामना

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  4. ushma ji
    अति सुन्दर , बधाई स्वीकारें.

    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें.

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  5. ये धारा अमर है ,
    आइना दिखाती रहेगी ,
    युगों युगों तक
    यह अमरता कायम रहे .. सुन्दर रचना

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  6. धारा कभी रूकती नहीं
    बहा ले जाती है बाधाओं को
    तोड़ देती है चट्टानों को ,
    उसे चाहिए अपना संकल्प !
    सत्य संकल्प !!

    वाह ! बहुत ख़ूब !

    सुंदर रचना के लिए बधाई उषा राय जी!


    त्यौंहारों के इस माहौल में
    आपको सपरिवार
    दीपावली की बधाइयां !
    शुभकामनाएं !
    मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  7. जरुरत के पास
    समय और सीमा होती है ,
    पर लड़ाई के पास नहीं
    ...bahut sundar gahree baat..
    saarthak rachna..
    DEEPPARV kee aapko bhi sapariwar haardik shubhkamnayen!!

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  8. संकल्प पूरा करना जब जीवन का ध्येय बन जाय तो धारा सतत प्रवाहित होती है ... सुन्दर रचना ..

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  9. और धारा कभी रूकती नहीं
    बहा ले जाती बाधाओं को
    तोड़ देती है चट्टानों को ,
    उसे चाहिए अपना
    संकल्प ! सत्य संकल्प

    धारा कभी रुकनी भी नहीं चाहिए. यही तो जीवन है निरंतर प्रवाह सतत और सत्य संकल्प

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  10. भावपूर्ण रचना.
    दीपोत्सव की शुभकामनायें.

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  12. sahaj shbdo me itni ghri bhavna ,
    yhi hai jindgi ka shi flsfa .
    ati uttam .
    ab chhth ke pvan prv ki hardik bdhai .

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