कभी आते हो तुम
यों ही हडबडी में ,
अतिरिक्त दुःख से उदासीन
कुछ ढूंढते कुछ पूछते ;
गहरी ख़ामोशी ओढ़े !
बहुत दिन बीत जाते हैं
बिना किसी सुख के
दरक ही जाते हैं ...
दुःख भी !
कहीं कुछ भी तो नहीं
छीज जाते हैं झगड़े भी !
तुम नहीं जानते
मैं नहीं मानती
क्योंकि दीखता नहीं
पर प्यार है
यहीं कहीं ..................!
झगड़ना और रूठना भी प्यार है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह...लाजवाब...बधाई स्वीकारें
प्रत्युत्तर देंहटाएंनीरज
बहुत ही प्यारी बात कही आपने। बधाई।
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मायावी मामा?
रूमानी जज्बों का सागर..
"बहुत दिन बीत जाते हैं
प्रत्युत्तर देंहटाएंबिना किसी सुख के "
!!!!!!!!!!!!!!!!!!! लाजवाब !!!
मै चकित हूँ !!!!!!!!!
जज़्बात खूबसूरती से लिखे हैं ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत दिन बीत जाते हैं
प्रत्युत्तर देंहटाएंबिना किसी सुख के
दरक ही जाते हैं ...
दुःख भी !
दरक जाते हैं दुःख भी !इसके प्रति भी एक उदासीनता है !
एक अनमनी सी सी उदास सी बेहद पहचानी हुई कविता है . तुम्हें बधाई !
बहुत ही हृदयस्पर्शी भावाभिव्यक्ति....
प्रत्युत्तर देंहटाएंब्लॉग से दूर रहना दुखी करता है ,पर आप सबका इतना प्यार और साहस देना सब दुःख दूर कर देता है ! आप सबका हार्दिक अभिनंदन करती हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्यार तो होता ही है ... रूठने और मनाने लें .. बिखरा रहता हजी आस पास अनजाने ही जो नज़र नहीं आता ... इस उदासी से बाहर आना अच्छा है ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut hi gahre bhaw ... pyaar hai yahin kahin
प्रत्युत्तर देंहटाएंकहाँ थी अब तक आप ???? बड़ी लंबी ख़ामोशी के बाद आई... भी तो प्यार के होने का अहसास और न होने के दुःख के जज्बात के साथ. अच्छा लगा इतने लंबे अंतराल के बाद आपको पढ़ना
प्रत्युत्तर देंहटाएंहृदयस्पर्शी भावाभिव्यक्ति....
प्रत्युत्तर देंहटाएंisi ko pyar kahte hain dil se likhi gayi sahi bat
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut badiya marmsparshi rachna..
प्रत्युत्तर देंहटाएंNAVRATRI kee haardik shubhkamnayen
इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें.
प्रत्युत्तर देंहटाएंकृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें .
कमाल का लेखन है.....यह गतिमान रहिए ...बधाई
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