सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

हिसाब करो




आये हैं लडके शहर में देने परीक्षा !
उन्हें भविष्य नजर नहीं आता ! !
हर कदम है नियम कानून उन्हें,
सडक पर चलना नहीं आता ! !
बेकारी के बोझ, बेरुखी से परेशान!
उन्हें अलग से दिखना नहीं आता !!
बैठ गयी है धांधली जो आफिसों में ,
जमाने का रफ्तार समझ नहीं आता ! !
रफ्तार जो दरकिनार करती है उन्हें !
बैठ गये रेल पर और अब कुछ नहीं सुहाता !!
उठो देश के जवानो, लुटेरों को बेनकाब करो !
हक जिसने लूटा है उससे अपना हिसाब करो !!