मंगलवार, 11 जनवरी 2011

यादें

कच्ची तोड़ सुखाई यादें
शाम के रंग रंगी उदास यादें ,
राह चलते पुल पेड़ मकान नदी ,
के संग छूटती ओझल होती यादें !

गिलहरी की पूंछ सी फिसलती यादें !

उड़ते पंखों वाली खुशियों की यादें !

बेमुरौवत दिल को दुखाती यादें !

इन सबको बहुत भुलाया ,
पर भूली नही दिल पर ,
सिल की तरह जमीं,
बैठी यादें !

25 टिप्‍पणियां:

  1. यादें तो होती ही ऐसी ही हैं और ये ही तो हैं जो कोई छीन नहीं सकता चुरा नहीं सकता. कितनी सही बात कही है आपने बेहतरीन.........

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  2. आदरणीया ऊषा राय जी

    नमस्कार !

    बहुत भुलाया ,
    पर भूली नही दिल पर ,
    सिल की तरह जमी,
    बैठी यादें !
    बहुत भावपूर्ण … बस, थोड़ा और विस्तार मिल जाता … … … !

    देखें -
    यादों का इक झोंका आया, जाने कितने बरसों बाद !
    पहले इतना रोये नहीं थे, जितना रोये बरसों बाद !

    या फिर -
    यादें न जाए बीते दिनों की
    जा'के न आए जो दिन;
    दिल क्यूं बुलाए उन्हें … ?

    लगे रहें … !

    ~*~ नव वर्ष २०११ मंगलमय हो ! ~*~

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  3. यादों का सिलसिला ..
    बहुत खूब

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  4. आदरणीय राजेन्द्र जी !नमस्कार ! नव वर्ष की मंगलमय शुभ कामनाएं ! वास्तव में आपकी कविता बहुत सुंदर है ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

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  5. बहुत भुलाया ,
    पर भूली नही दिल पर ,
    सिल की तरह जमी,
    बैठी यादें !
    बहुत भावपूर्ण| धन्यवाद|

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  6. आपके व्लाग पर पहली बार आया हूँ बहुत सार्थक रचना पढने को मिली
    सुंदर भावपूर्ण रचना ,बधाई

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  7. यक़ीनन कहाँ छूटती हैं यादें..... सुंदर

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  8. आदरणीया ऊषा राय जी
    नमस्कार !
    आपकी कविता बहुत सुंदर है !
    आपको और आपके परिवार को मकर संक्रांति के पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ !"

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  9. धन्यवाद, मेरे ब्लॉग से जुड़ने के लिए और बहुमूल्य टिपण्णी देने के लिए

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  10. यादें नहीं भुलाई जातीं
    इन सबको बहुत भुलाया ,
    पर भूली नही दिल पर ,
    सिल की तरह जमीं,
    बैठी यादें .. सच लिखा है तुमने ..हमारी यादें तो और भी पक्के रंगों की होतीं हैं बाबुल के घर की यादें उम्र भर भुलाए नहीं भूलतीं हैं .

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  11. acchi yaaden....pyaari yaaden....bhulaayi nahin jaati yaaden....isliye to kahalaati hain yaaden....khair acchi likhi hai aapne kavita...!!

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  12. कच्ची तोड़ सुखाई यादें
    शाम के रंग रंगी उदास यादें........
    बहुत सुन्दर बिम्ब है!

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  13. ''उड़ते पंखों वाली खुशियों की यादें''

    याद आए तो दिल मुनव्वर हो ...
    दीद हो जाये तो नज़र महके ... !

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  14. आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद ! उम्मीद करती हूँ आगे भी आप सबका सहयोग इसी प्रकार मिलता रहेगा ! धन्यवाद

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  15. bahut hi sundar kavita , yaado ko jagaati hui kavita ,,, aapko salaam

    ----------
    मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
    आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
    """" इस कविता का लिंक है ::::
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
    विजय

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  16. yaden kisi share ki mohtaj nhi
    vo to bs aati hai aati hi chli jati hai
    sil ki trha jmi
    kya bat hai .

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