कच्ची तोड़ सुखाई यादें
शाम के रंग रंगी उदास यादें ,
राह चलते पुल पेड़ मकान नदी ,के संग छूटती ओझल होती यादें !
गिलहरी की पूंछ सी फिसलती यादें !
उड़ते पंखों वाली खुशियों की यादें !
बेमुरौवत दिल को दुखाती यादें !
इन सबको बहुत भुलाया ,
पर भूली नही दिल पर ,
सिल की तरह जमीं,
बैठी यादें !
यादें तो होती ही ऐसी ही हैं और ये ही तो हैं जो कोई छीन नहीं सकता चुरा नहीं सकता. कितनी सही बात कही है आपने बेहतरीन.........
प्रत्युत्तर देंहटाएंयादें कहाँ छोड़ती हैं।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआदरणीया ऊषा राय जी
प्रत्युत्तर देंहटाएंनमस्कार !
बहुत भुलाया ,
पर भूली नही दिल पर ,
सिल की तरह जमी,
बैठी यादें !
बहुत भावपूर्ण … बस, थोड़ा और विस्तार मिल जाता … … … !
देखें -
यादों का इक झोंका आया, जाने कितने बरसों बाद !
पहले इतना रोये नहीं थे, जितना रोये बरसों बाद !
या फिर -
यादें न जाए बीते दिनों की
जा'के न आए जो दिन;
दिल क्यूं बुलाए उन्हें … ?
लगे रहें … !
~*~ नव वर्ष २०११ मंगलमय हो ! ~*~
शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार
सहज,अभिराम,उम्दा.
प्रत्युत्तर देंहटाएंयादों का सिलसिला ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत खूब
यादों की याद।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआदरणीय राजेन्द्र जी !नमस्कार ! नव वर्ष की मंगलमय शुभ कामनाएं ! वास्तव में आपकी कविता बहुत सुंदर है ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत भुलाया ,
प्रत्युत्तर देंहटाएंपर भूली नही दिल पर ,
सिल की तरह जमी,
बैठी यादें !
बहुत भावपूर्ण| धन्यवाद|
आपके व्लाग पर पहली बार आया हूँ बहुत सार्थक रचना पढने को मिली
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुंदर भावपूर्ण रचना ,बधाई
यक़ीनन कहाँ छूटती हैं यादें..... सुंदर
प्रत्युत्तर देंहटाएंyaadein to bas yaad hi aati hai..
प्रत्युत्तर देंहटाएंHappy Lohri To You And Your Family..
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आदरणीया ऊषा राय जी
प्रत्युत्तर देंहटाएंनमस्कार !
आपकी कविता बहुत सुंदर है !
आपको और आपके परिवार को मकर संक्रांति के पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ !"
धन्यवाद, मेरे ब्लॉग से जुड़ने के लिए और बहुमूल्य टिपण्णी देने के लिए
प्रत्युत्तर देंहटाएंयादें नहीं भुलाई जातीं
प्रत्युत्तर देंहटाएंइन सबको बहुत भुलाया ,
पर भूली नही दिल पर ,
सिल की तरह जमीं,
बैठी यादें .. सच लिखा है तुमने ..हमारी यादें तो और भी पक्के रंगों की होतीं हैं बाबुल के घर की यादें उम्र भर भुलाए नहीं भूलतीं हैं .
bahut khoobsoorat.......par yaade to yaade hai yaadon ka kya!!!!!!!!!!1
प्रत्युत्तर देंहटाएंacchi yaaden....pyaari yaaden....bhulaayi nahin jaati yaaden....isliye to kahalaati hain yaaden....khair acchi likhi hai aapne kavita...!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंअच्छी कविता !
प्रत्युत्तर देंहटाएंकच्ची तोड़ सुखाई यादें
प्रत्युत्तर देंहटाएंशाम के रंग रंगी उदास यादें........
बहुत सुन्दर बिम्ब है!
अच्छी कविता।
प्रत्युत्तर देंहटाएंyadon per bahut sunder likhi hain.
प्रत्युत्तर देंहटाएं''उड़ते पंखों वाली खुशियों की यादें''
प्रत्युत्तर देंहटाएंयाद आए तो दिल मुनव्वर हो ...
दीद हो जाये तो नज़र महके ... !
Good lines.
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप सबका बहुत बहुत धन्यवाद ! उम्मीद करती हूँ आगे भी आप सबका सहयोग इसी प्रकार मिलता रहेगा ! धन्यवाद
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut hi sundar kavita , yaado ko jagaati hui kavita ,,, aapko salaam
प्रत्युत्तर देंहटाएं----------
मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
विजय
yaden kisi share ki mohtaj nhi
प्रत्युत्तर देंहटाएंvo to bs aati hai aati hi chli jati hai
sil ki trha jmi
kya bat hai .