मंगलवार, 11 जनवरी 2011

यादें

कच्ची तोड़ सुखाई यादें
शाम के रंग रंगी उदास यादें ,
राह चलते पुल पेड़ मकान नदी ,
के संग छूटती ओझल होती यादें !

गिलहरी की पूंछ सी फिसलती यादें !

उड़ते पंखों वाली खुशियों की यादें !

बेमुरौवत दिल को दुखाती यादें !

इन सबको बहुत भुलाया ,
पर भूली नही दिल पर ,
सिल की तरह जमीं,
बैठी यादें !