नैनी ताल की
यह नयना कर झील
देखती रहती है ,
गम्भीर होते दृढ चित्त
पहाड़ को पति वत !
हरे भरे लम्बे होते
स्वस्थ पेड़ों को पुत्रवत !
गुन गुनाती बादलों के संग
दिल खुश हवाओं को पुत्रीवत !
और सबसे बाते करती ,
स्नेह जल से बांधती
आँखों के एक कोर से
दूसरी कोर तक डबडबाई ,
पर बिना छलके ,
मन्त्र मुग्ध कर देती है !
अपनी अबूझ जादू से
मन मोह लेती है स्त्रीवत !
नैनी ताल की यह नैना कार झील !
कितना सुंदर बिम्ब लिया है..... बेहद सुंदर रचना ..... नैनीताल के झील सी....
प्रत्युत्तर देंहटाएंझील, पेड़, पहाड़, एक अनूठा सम्बन्ध प्रकृति अंगों का।
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह, मन मोह लिया ... चित्र भी और कविता भी !
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह अच्छा लगा नैना झील के मन की बात आपकी जुबानी जानना
प्रत्युत्तर देंहटाएंनए और ताजगी भरे बिम्ब।
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत मन से पढ़ी आपकी प्यारी सी कविता एक प्रशंसकवत ... !!!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंprakarti k rango ne man moh liya .............
प्रत्युत्तर देंहटाएंhttp://amrendra-shukla.blogspot.com/
आँखों के एक कोर से
प्रत्युत्तर देंहटाएंदूसरी कोर तक डबडबाई !
..............
सुंदर विम्ब !!!
समग्र दृश्य का यह संवेदित मानवीकरण बहुत अच्छा लगा !" आँखों केएक कोर से दूसरी कोर तक डबडबाई "....पहाड़ को पतिवत व पेड़ों को पुत्रवत देखती सलिला सम्मुख साकार हो गयी ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंprkriti ka bhut hi sundar manvikrn . kvita me jo jheel ki trlta bhasit ho rhi hai vhi iski khoobsoorti hai .
प्रत्युत्तर देंहटाएंबेहद ही उम्दा और सटीक रचना .
प्रत्युत्तर देंहटाएंaapke shabdon के maadhyam से देख li ये naina jheel ..... बहुत suna tha ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंनैनी ताल की
प्रत्युत्तर देंहटाएंयह नयना कर झील
मन मोह लेती है स्त्रीवत !
नैनी ताल की यह नैना कार झील !
उषा जी कई बार पढ़ी आपकी कविता ....
यह 'कर झील ' या 'कार झील ' का अर्थ समझ नहीं पाई ....
मैंने तो वह झील कभी नहीं देखी, फिरभी आपके शब्दचित्र ने उसे जैसे साक्षात उतार दिया है।
प्रत्युत्तर देंहटाएं---------
आपका सुनहरा भविष्यफल, सिर्फ आपके लिए।
खूबसूरत क्लियोपेट्रा के बारे में आप क्या जानते हैं?
very nice...
प्रत्युत्तर देंहटाएंmere blog par bhi kabhi aaiye waqt nikal kar..
Lyrics Mantra
हरकीरत जी ! यह नयनाकार झील है !जो वास्तव में आँखों के आकार की है !आपने ध्यान दिया ! धन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंउषा जी ,
प्रत्युत्तर देंहटाएंआज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ ...और सच मानिये कि अब तक बहुत अच्छी कविताओं को पढ़ने से महरूम थी ...
आपकी कई कविताएँ पढ़ डालीं ..सीली माचिस बहुत अच्छी लगी ...और यह नैना झील भी बहुत खूबसूरत रचना है ...
मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार ..कभी मेरा यह ब्लॉग भी देखें ...मुझे सुकून मिलेगा ..आभार
http://geet7553.blogspot.com/2010/12/blog-post_24.html
संगीता स्वरूप जी ! आप मेरे ब्लॉग पर आई और मेरी कविताओं को पसंद भी कीं , ये मेरे लिए बहुत ही ख़ुशी की बात है ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंनैनी ताल की
प्रत्युत्तर देंहटाएंयह नयना कर झील
देखती रहती है ,
गम्भीर होते दृढ चित्त
पहाड़ को पति वत !
हरे भरे लम्बे होते
स्वस्थ पेड़ों को पुत्रवत !
गुन गुनाती बादलों के संग
दिल खुश हवाओं को पुत्रीवत !
yah soch... alag bilkul alag
बहुत ही सुंदर.
प्रत्युत्तर देंहटाएंनयनों की इस झील के सफ़र में मैं भी तो तुम्हारे साथ थी हूँ भी मगर तुमने इतनी शिद्दत से उसे कब अपने भीतर भर लिया मैं तो जान भी न पायी ..उसका डबडबाना तो देखा पर तुम इतना छलकी यह बाद में जाना . बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति .. बधाई .
प्रत्युत्तर देंहटाएंहाँ प्रज्ञा ! उस अपार सुन्दरता को देखकर डबडबाई तो तुम भी थी ...तुम सम्भल गयी ! वहां के सातों ताल कुदरत के करिश्में हैं ! सधन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाह जी वाह नैना झील की ये सुन्दरता और आप की ये खूबसूरत रचना कमाल कर गई।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपको नववर्ष 2011 मंगलमय हो ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुन्दर शब्दों की बेहतरीन शैली ।
भावाव्यक्ति का अनूठा अन्दाज ।
बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति ।
हिन्दी को ऐसे ही सृजन की उम्मीद ।
धन्यवाद....
satguru-satykikhoj.blogspot.com
वाह अच्छा लगा बहुत ही सुंदर.
प्रत्युत्तर देंहटाएंखूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
प्रत्युत्तर देंहटाएंअनगिन आशीषों के आलोकवृ्त में
तय हो सफ़र इस नए बरस का
प्रभु के अनुग्रह के परिमल से
सुवासित हो हर पल जीवन का
मंगलमय कल्याणकारी नव वर्ष
करे आशीष वृ्ष्टि सुख समृद्धि
शांति उल्लास की
आप पर और आपके प्रियजनो पर.
आप को सपरिवार नव वर्ष २०११ की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर,
डोरोथी.
जय श्री कृष्ण...आपका लेखन वाकई काबिल-ए-तारीफ हैं....नव वर्ष आपके व आपके परिवार जनों, शुभ चिंतकों तथा मित्रों के जीवन को प्रगति पथ पर सफलता का सौपान करायें .....मेरी कविताओ पर टिप्पणी के लिए आपका आभार ...आगे भी इसी प्रकार प्रोत्साहित करते रहिएगा ..!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंnayna naam hii itnaa sundarr hai ....!!kii iss kavitaa parr charr chand lagaa rhaa hai aurr picturee bhii bilkul naynaa jaisaa hi hai ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंwah. kitna sunder varnan ki hain .
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप सबका बहुत बहुत धन्यवाद ! हमारा आप का स्नेह सम्बन्ध अटूट रहे ! नव वर्ष की मंगलमय शुभ कामनाओं के साथ आप सबका अभिनंदन करती हूँ ! आइये हम एक सम्वेदन शील समाज के निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभाएं ! अद्भुत है यह ब्लॉग संसार जहाँ हम अपने सुख दुःख के साथ देश की सभी तरह की घटनाओं पर व्यापक प्रतिक्रिया देते है ! एक बार फिर आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंvery gud poem
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