रविवार, 12 दिसंबर 2010

नयना


नैनी ताल की
यह नयना कर झील
देखती रहती है ,
गम्भीर होते दृढ चित्त
पहाड़ को पति वत !
हरे भरे लम्बे होते
स्वस्थ पेड़ों को पुत्रवत !
गुन गुनाती बादलों के संग
दिल खुश हवाओं को पुत्रीवत !
और सबसे बाते करती ,
स्नेह जल से बांधती
आँखों के एक कोर से
दूसरी कोर तक डबडबाई ,
पर बिना छलके ,
मन्त्र मुग्ध कर देती है !
अपनी अबूझ जादू से
मन मोह लेती है स्त्रीवत !
नैनी ताल की यह नैना कार झील !