वे और उनके बच्चे
कपास के सारे पौधे हमने
टोपियों के लिए चुन लिए
और वे
लंगोटियों का ख्वाब देखते रहे !
वे इंतजार करते रहे
कि बालियों का दूध जमें
और हमने उन्हें
मदिरालय के लिए
तोड़ लिया !
हम हवा में भरते रहे खुशबु
और वे कर्ज मांगते रहे साँस
वे सोचते रहे
कि हम जरा मुस्कराएँ
और हम
उनकी मूढ़ता पर खिलखिलाते रहे !
हम अपने बच्चों को
पटाखे दिलवाते रहे
और उनके बच्चे
बंदूक चलाना सीख गये !
उषाजी इतनी सुंदर अर्थपूर्ण रचना पढवाने के लिए आभार...... हर पंक्ति प्रभावपूर्ण है.....
प्रत्युत्तर देंहटाएंVery touchy poem.Thanx a million for posting it Usha ji.
प्रत्युत्तर देंहटाएंDil ko chu gayi Rachna .......post kerne k liye bahut bahut shukriya
प्रत्युत्तर देंहटाएंहम अपने बच्चों को
प्रत्युत्तर देंहटाएंपटाखे दिलवाते रहे
और उनके बच्चे
बंदूक चलाना सीख गये ...
बदलते परिवेश को शशक्त जिया है इस कविता ने .... बहुत खूब ...
वे सोचते रहे
प्रत्युत्तर देंहटाएंकि हम जरा मुस्कराएँ
और हम
उनकी मूढ़ता पर खिलखिलाते रहे
उषा जी बहुत ही गहरी बात. आज के हर माँ बाप कि यही परेशानी है. आज के हालात का सही आंकलन.
Heart touching postThanks.
प्रत्युत्तर देंहटाएंwaah !
प्रत्युत्तर देंहटाएंwaah !
bahut khoob,,,,,,,,,,,,,
kamaal ki kaarigari hai vyangya me....
achha laga
dhnyavaad usha ji !
हम अपने बच्चों को
प्रत्युत्तर देंहटाएंपटाखे दिलवाते रहे
और उनके बच्चे
बंदूक चलाना सीख गये !
म अपने बच्चों को
पटाखे दिलवाते रहे
और उनके बच्चे
बंदूक चलाना सीख गये !
बहुत खूब .....!!
अब्दुल बिस्मिल्लाह जी को पहली बार पढ़ा ....
अच्छी रचना है ....!!
वे सोचते रहे
प्रत्युत्तर देंहटाएंकि हम जरा मुस्कराएँ
और हम
उनकी मूढ़ता पर खिलखिलाते रहे !
हम अपने बच्चों को
पटाखे दिलवाते रहे
और उनके बच्चे
बंदूक चलाना सीख गये !
Bahut sunder andaz--
अब्दुल बिस्मिल्लाह जी को कथाक्रम 2010 सम्मान की हार्दिक बधाई ...। उनका उपन्यास ''झीनी झीनी बीनी चदरिया '' याद आ रहा है ...! लखनऊ के लिए तो यह गौरव का क्षण है ही ,हिन्दी साहित्य के लिए भी फक्र की बात है...। बिस्मिल्लाह जी की कलम को सलाम !!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंAbhivyakti kisi bhi roop mein kiya jay-uske bhaw man ko mohit kar dete hai-kuchh sochne ke liye majboor kar dete hai .Good post.
प्रत्युत्तर देंहटाएंअब्दुल भाई को बहुत बहुत बधाई ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप सबने डा० साहब की कविता पढ़ी ,बधाई दी और व्यापक प्रतिक्रिया भी ! आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद ! उम्मीद है आगे भी आप सबका सहयोग बना रहेगा ! धन्यवाद !
प्रत्युत्तर देंहटाएंडा०अब्दुल बिस्मिल्लाह को बहुत-बहुत बधाई।
प्रत्युत्तर देंहटाएं..आपको भी धन्यवाद कि आपने अच्छी कविता पढ़वाई।
bahut bahut shukriya padhwane ke liye
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