गुरुवार, 23 सितंबर 2010

मै समाचार हूँ

मैं समाचार हूँ जनहित में जारी
मुझे सुनते ही सक्रिय हो जाते हैं ,
दो मुहें सर्प और फटी जीभ वाले !

जगह जगह फ़ैल जाते हैं
टेढ़ी चाल चलने वाले ,
जहर बुझी बातों वाले ,
धुएं के गुबार उड़ाने वाले ,
अपनेपन का हाथ रख
गर्दन दबाने वाले !

मैं खड़ा हूँ सडक पर
लिए निजता और शुभता
डटा रहूँगा निहत्था ही

जब तक की वे जाग नहीं जाते
जिनके हित के लिए ,
मेरा प्रयास है निरंतर ,
मै समाचार हूं ,
जनहित में जारी !

23 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत रोचक और सुन्दर अंदाज में लिखी गई रचना .....आभार

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  2. मैं समाचार हूँ जनहित में जारी

    .........बहुत खूब, लाजबाब !

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  3. Usha Masi ji
    आप का ह्र्दय से बहुत बहुत
    धन्यवाद,
    ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.
    मेरे ब्लॉग से जुड़ने के लिए और बहुमूल्य टिपण्णी देने के लिए

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  4. जब तक की वे जाग नहीं जाते
    जिनके हित के लिए ,
    मेरा प्रयास है निरंतर ,
    मै समाचार हूं ,
    जनहित में जारी !
    ............!!!
    आपकी सद्भावना जरूर जगाएगी उन्हे !

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  5. जनहित में जारी आपकी कविता सचमुच जनहित में है।

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  6. जब तक की वे जाग नहीं जाते
    जिनके हित के लिए ,
    मेरा प्रयास है निरंतर
    बेहद खूबसूरत है जनहित में जारी यह समाचार ...
    अलग सा ...

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  7. बिलकुल अलग सी और प्रभावी रचना.

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  8. kya baat hai...vaah, chhoti magar dhardaar kavita. samajhdaro ko ishara kafee hai. sadbhavana banee rahe iske liye zarooree hai is tarah ka lekhan. dhanyvaad aapko.

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  9. जब तक की वे जाग नहीं जाते
    जिनके हित के लिए ,
    मेरा प्रयास है निरंतर ,
    मै समाचार हूं ,
    जनहित में जारी !
    अच्छी पोस्ट. जन हित में जारी और जगाने के लिए निरंतर प्रयास भी अपेक्षित है पर ये कुम्भकर्णी नींद वाले कब जागेंगे????

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  10. काश .... इस उद्घोष से वो जाग जाएँ .... बहुत अच्छा लिखा ...

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  11. नहीं उषा ! इससे तो कहीं बेहतर है "स्वीकार लो मुझे" कम से कम उसमें कविता के खिलने की सम्भावना तो है! .. उस मामले में आप थोड़ी जल्द-बाज़ी कर गयी हैं..बस ! ..एक तो उसमें लता-भाव वाला शीर्षक मुझे ठीक नहीं लगा था ..दूसरे कुछ शब्दों को इधर उधर करने से उसमें एक निखार आ सकता था .. लेकिन यह तो ..!
    मैं जब आपको पढता हूँ तो एक एक शब्द में उतर कर पढता हूँ जहां उन शब्दों की अर्थ-छटाएं बिखरती हैं वहाँ कहीं आपकी झलक मिलती है मुझे तो उस झलक का पीछा करने में ही कविता का स्वाद मिलता है

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  12. मैं खड़ा हूँ सडक पर
    लिए निजता और शुभता
    डटा रहूँगा निहत्था ही
    पूरी तरह निहत्था है हर लिखनेवाला भी और जुटा है जनहित में जारी विचारों को कपास की तरह बिखेरने में .सफलता जरूर मिलेगी ही भले देर से . तुम्हारी कविता ने ध्यान खींचा है !तुम्हें बधाई !

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  13. सुन्दर शब्द दिए हैं मनोभावों को

    उम्दा कविता

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  14. मैं समाचार हूँ " यह पंक्तियाँ ही अपने आप मे सशक्त हैं

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  15. usha di
    namaskar
    mmaine kitni baar aapke blog par comments daalane chahe par jaane kyon aapka comments box khulta hi nahi tha.aaj achanak hi fir try kiya to aapka blog khul gaya .sach me mujhe itni khushi hui ki mai bata nahi sakti.
    जगह जगह फ़ैल जाते हैं
    टेढ़ी चाल चलने वाले ,
    जहर बुझी बातों वाले ,
    धुएं के गुबार उड़ाने वाले ,
    अपनेपन का हाथ रख
    गर्दन दबाने वाले
    bahut hi kadvi sachhai ko bayaan karti ek sashkt rachna,shandaar abhivykti.
    poonam

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  16. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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  17. janhit me jari samachar ki udgaar batane ke liye sukhriya........pyari rachna..:)

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  18. आप सबने इस रचना को पसंद किया, इसे सराहा !आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद !

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  19. बेहद खूबसूरत और प्रभावी रचना.

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