मंगलवार, 22 दिसंबर 2009

~जा रे मन~


जा रे मन
छटपटाना ही तेरी नियति है !

जो तू होता अवंरा भंवरा
फूलों पर मंडराता ,
छक के करता पान मद स्नान
मिट जाती प्यास
मिल जाता चैन करार
जा रे मन,
लट पटाना ही तेरी नियति है !
छट पटाना ही तेरी
नियति है !!



जो तू होता इरही विरही
प्रिय को रोज रिझाता
खुलते बाहों के द्वार
गल जाता अभिमान
मन मिलन में एकाकार
जा रे मन,
अटपटाना
ही तेरी नियति है !
छट पटाना ही तेरी नियति है !!




14 टिप्‍पणियां:

  1. मन की गति को अद्भुत शब्द दिए हैं......

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  2. बहुत सुंदर रचना है तुम्हारी .. प्रेम की बेचैनी को शब्दों से बाँध दिया है तुमने इसलिए वह मुखर होकर अभिव्यक्ति पा गयी है .छटपटाना ही नियति है इसे स्वीकार कर मन की तड़प को पूरी तरह से बयां कर रही है कविता!!

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  3. अच्छी लगी आपकी यह रचना ऊषा जी. बधाई.

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  4. AAP SHABD AUR CHHAND KE MOH SE BAHAR AA JAO... KAVITA KO APNE SHABD SWAYAM CHYAN KARNE DO..KAVITA KA BHAV PAKSH BAHUT SUNDAR HAI..NARI MAN SE UTSARJIT, EK KISM KI BGAWAT KI KHOOSHBOO AATI HAI ..JO MUJHE BAHUT PRIY HAI..
    KOI AUR KYA KRTA BEVFAI DIL HI DUSHMAN THA JMANE SA

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  5. वाह ! उषा जी कहाँ अंतर्ध्यान हो गयीं थीं.अब ये तो कह नहीं सकती की गली गली ढूंढा पर हाँ ब्लॉग ब्लॉग तो ढूंढा. मेल भी किया और कल शाम ५.३० तक अनुपस्थिति भी दर्ज की. सब खैरियत तो है? माना अपने शहर से दूर हूँ पर अपने शहर वालों को दिल पास रखने का हुनर जानती हूँ.ब्लॉग पर आते ही गज़ब ढा दिया....
    बधाई स्वीकारें

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  6. मन तो एक पागल पखेरू है उड़ जाता है किसी भी मौज के साथ ..........
    बहुत सुंदर शब्दों में मन की उड़ान को पकड़ा है आपने ..........

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  7. अवंरा भंवरा
    इरही विरही

    वाह उषा जी, नए शब्दों से अच्छा परिचय कराया आपने।
    बहुत सुन्दर रचना।

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  8. Man ki chanchalta ko shabdon ke madhyam se bakhubi ukera hai.BAdhai.

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  9. जा रे मन
    छटपटाना ही तेरी नियति है !
    ---वाह यह तो मेरे मन की भी बात है।

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  10. mann ko kosna ,vidhi sangat nahi hai!
    mann toh apne yogay suyogay sanyog kara hi leta hai.
    bas aavshakta hai toh
    man ko uchit disha dene ki

    pryaas uttam hai
    bhavishey mein lagan sheel rehen ki aavshyakta haii

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  11. नव वर्ष की अशेष कामनाएँ।
    आपके सभी बिगड़े काम बन जाएँ।
    आपके घर में हो इतना रूपया-पैसा,
    रखने की जगह कम पड़े और हमारे घर आएँ।
    --------
    2009 के ब्लागर्स सम्मान हेतु ऑनलाइन नामांकन
    साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन के पुरस्कार घोषित।

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  12. मोहब्बत मेराज है फ़ासलों में
    बड़े प्यार से दूरियां बोलती हैं .

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