शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2009

सच कौंधता है


नदी माँ है बच्चे ,
बिल्कुल मेरी तरह ,
प्यार दुलार
करुणा से भरी !

पर भूल के भी पूछना मत ,
उसके रास्तो के बारे में ...

समतल ,रेतीला ,पथरीला ,
पूछ सकते हो ,पर पूछना नही ...
उसकी तरलता की मात्राएँ ,
कभी नही जोड़े हाथ उसने ,

समुद्र की तरह !
भले ही सूखती रही ,
नदी फल्गु की तरह !

तारती रही मृतात्माओं को !
फ़िर धारण कर लेती ...तुम्हारी खातीर...
और सुनो !
कभी भय खाए लोंगो से मत पूछना ,
नदी के बाढ़ की कहानी !
देखभाल करना , सच ढूढ़ना ,
सच सहने की ताब रखना ,
सच को कोई सुना नही सकता ,
सच केवल कौंधता है ,
वह भी कभी कभी !

23 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना । आभार

    ढेर सारी शुभकामनायें.

    SANJAY
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. अनुभूति और एकांत में
    एक दूसरे से इतनी बार बातें की
    की पुल बन गया अंतहीन
    अब जब गुजरोगे वहाँ से
    तो नदी की पीडाएं मिलेंगी तुम्हे
    हाँ तुम सच के साथ
    उनके साथ हो लेना......
    वाह!

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  3. सच को कोई सुना नही सकता ,
    सच केवल कौंधता है .......bilkul

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  4. अभी पहली कविता देखी है ... वाह! प्रथम पंक्ति से लेकर डेल्टा तक गुरु गंभीर संतुलित प्रवाह के साथ... वाह! सच केवल कौंधता है ... एक और वाह के साथ

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  5. नदी के बाढ़ की कहानी !
    देखभाल करना , सच ढूढ़ना ,
    सच सहने की ताब रखना ,
    सच को कोई सुना नही सकता ,
    सच केवल कौंधता है ,
    वह भी कभी कभी .......

    SACH LIKHA ...SACH KO DEKHNA AUR SAMAJHNA AASAAN NAHI HOTA ... BAHOOT HI GAHRE ARTH LIYE AAPKI RACHNA ....

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  6. बेहतरीन भाव बेहतरीन अभिव्यक्ति. बधाई स्वीकारें.

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  7. सच केवल कौंधता है , sahi kaha aapne.........


    behtareen bhaav liye ek bahut hi achchi kavita.......

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  8. sach hi to hai jisase aadmi swayam bhi door bhagta hai. magar kabtak?
    krishnabihari

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  9. नदी माँ है . उसके रस्ते रेतीले हैं उनको जानने की कोशिश न करना क्योंकि तुम्हारे वश का नहीं उन्हें जानना .. बहुत सुंदर उसकी तरलता की मात्रा और उसकी बाढ़ .. वह भी कम नहीं हैं .. जानने की कोशिश न करना ...क्योंकि सच खुद ही कौंधता है .
    तुमने माँ को लाकर खडा कर दिया है . माँ नदी होती है . पूर्ण और अप्रतिम रूप है यह माँ का! नदी का!
    बहुत सुंदर रचा है . बहुत . बधाई तुम्हें .

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  10. bahut bahut achaa hai mam ...........bahut hi sunder chitr uker diya hai man me thanx......

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  11. कभी भय खाए लोंगो से मत पूछना ,
    नदी के बाढ़ की कहानी !

    Wah !

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  12. सुंदर व्यंजनाएं।
    दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
    आप ब्लॉग जगत में महादेवी सा यश पाएं।

    -------------------------
    आइए हम पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।

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  13. दीवाली की मंगल कामनाएं ............
    'जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना ,अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाये .

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  14. नदी के बाढ़ की कहानी !
    देखभाल करना , सच ढूढ़ना ,
    सच सहने की ताब रखना ,
    सच को कोई सुना नही सकता ,
    सच केवल कौंधता है ,
    वह भी कभी कभी !

    वाह.....!!

    उषा जी बहुत खूब लिखतीं हैं आप ...!!

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  15. कभी नही जोड़े हाथ उसने ,
    समुद्र की तरह !
    भले ही सूखती रही
    नदी फल्गु की तरह
    बहुत सुंदर भाव सुंदर रचना
    आभार

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  16. बहुत दिनों के बाद भटकते भटकते आखिर आपकी यह कविता मिल ही गई ... कविता शायद चीज़ ही ऐसी है एक बार पड़ने से तृप्ति नहीं होती

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  17. आपके पन्ने तक कहाँ से पहुँच ये याद ही नहीं रहा कविताओं को पढ़ने के बाद. बाढ़ और आखिरी गुलाब कविता ने बहुत प्रभावित किया और संजीदा भी.

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  18. बहुत उम्दा लिखा है बहुत खूब.

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