गुरुवार, 1 अक्तूबर 2009

दीपों की तरह


सर्दी की ठिठुरन में ,
आवरण खीँच कर ,
अक्सर याद किया है तुम्हे !

और तडप कर लिखा था एक खत !
बरफ पर अपनी गर्म उँगलियों से !
साथ ही पिघलती रही ,

पढा नही वह खत शायद ,
जो खुला था आसमान में ,
पंछियों की
पांतों की तरह ,
टेढी मेढ़ी लिखावट ,

और धरती पर जले दीपों की
तरह ,
भावनाओं की जगमगाहट !

दीपावली की असंख्य शुभकामनाये....

15 टिप्‍पणियां:

  1. बरफ पर अपनी गर्म उँगलियों से !
    साथ ही पिघलती रही
    भावनावों की ये जगमगाहट .. सच मन को छू गयी .. बहुत बधाई

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  2. दीपक -छाया
    नदी- किनारा
    धुंध -धुंआ
    धरती- आकाश
    जगत -तलहटी
    चौखट -आँगन
    हम - तुम दोनों
    इतने दूर
    हम- तुम दोनों
    इतने पास ..........
    मेरे पास है
    तुम्हारे
    दीपों की उजास .

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  3. आपकी इस रचना पर जितना लिखूं कम पढ़ जाएगा, इसलिए कुछ भी न लिखूं तो सार बहुत रह जाएगा...वाह! बहुत उम्दा लिखा है आपने.
    जारी रहें. शुभकामनाएं.
    ---


    हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

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  4. भावनात्मक अभिव्यक्ति और सुन्दर चित्र.

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  5. बर्फ पर गर्म उँगलियों से तो क्या अगर आपने बर्फ पर बर्फीली उँगलियों से भी लिखा होता तो भी आपका ये ख़त उतनी ही तड़प वाला होता
    सुंदर रचना के लिए बधाई
    मेरा ब्लॉग भी देखें rachanaravindra.blogspot.com

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  6. पढा नही वह खत शायद
    जो खुला था आसमान में ,
    पंछियों की पांतों की तरह.....

    Anuthi rachna hai.Badhai.

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  7. बहुत प्यारी रचना है।
    आपको भी करवाचौथ और दीपावली की शुभकामनाएं।
    ----------
    बोटी-बोटी जिस्म नुचवाना कैसा लगता होगा?

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  8. उषा जी , आज आपके ब्लॉग की बहुत सारी कवितायें पढ़ीं । यह अच्छा लगा कि आप भी समकालीन कविता के शिल्प मे कवितायें लिखती है । इस तरह हम अपने आप को ज़्यादा अच्छी तरह से अभिव्यक्त कर सकते हैं । और उष्मा के मुख्पृष्ठ पर पिघलता हुआ ग्लेशियर .. वह तो बहुत ही सुन्दर है और सार्थक भी -शरद

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  9. सर्दी की ठिठुरन में ,
    आवरण खीँच कर ,
    अक्सर याद किया है तुम्हे !
    .....
    बहुत खूब।

    आपको भी दीपावली की हादिक शुभकामनाएं।

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  10. बरफ पर अपनी गर्म उँगलियों से !
    साथ ही पिघलती रही
    भावनावों की ये जगमगाहट .


    भावनात्मक अभिव्यक्ति और बहुत खूबसूरत रचना.

    कृपया कमेन्ट बॉक्स से वर्डवेरीफिकेशन हटा दें.यह बड़ा इरीटेट करता है.
    आपको दीपावली की शुभकामनाएं।

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  11. bahut sundar rachnaa haii
    diwali ki shubkamnayee !!

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  12. आप सबने मेरी कविता देखी और उसको सराहा !
    बहुत बहुत धन्यवाद .. उम्मीद है ,आगे भी इसी तरह आप सबका प्रेम और सहयोग मिलता रहेगा !!!
    में आप सबकी आभारी हूँ !!!!!!

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  13. बरफ पर अपनी गर्म उँगलियों से !
    साथ ही पिघलती रही
    भावनावों की ये जगमगाहट .

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  14. बरफ पर अपनी गर्म उँगलियों से !
    साथ ही पिघलती रही .....

    kamaal ka shabd sanyojan hai aapki kavita mein .... bhav aur prastuti ki bejod misaal hai yek kaaljayee rachna .... bahoot hi achhaa likhti hain aap ...

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  15. मुझे नहीं मालूम था मैं हीरों की खदान में पहुँच गया हूँ एक से बड़कर एक ... लेकिन तराशने में लगता है थोडा कम समय दिया जाता है ... मेरी एक छोटी सी रचना यदि आप अपने ब्लॉग पर पोस्ट कर सकें ... मेरे ब्लॉग पर तो बहुत कम लोग आ पाते हैं
    यह रचना कविता के संदर्भ में है
    "तुम तो संकेत का सौन्दर्य हो
    व्यक्त अव्यक्त का अद्भुत संतुलन
    बादलों की ओट में धूप की अदा
    या पहाड़ का मौसम
    अब तो तुम हो और ये दिल
    अब तो तुम हो और ये आँखें
    अब तो तुम हो बस तुम! "

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