रविवार, 19 जुलाई 2009

बरसात
बरसात के झमाझम बारिश में भीगने के बाद मै वहां जाती
; जहाँ पानी कुछ देर और रुकता पानियों को उछालना ,खिलखिलाना
,
घर आकर भूल जाना ,यही थी बरसात ! एक दिन गई तो पानी थिर था
,
गम्भीर रहस्यमय आकर्षक ,
दबे
पांव झाँका वो पानी नही मेरा चेहरा था ,
पूरी
की पूरी मै भागने को हुई , की अचानक वह फ्रेम सा खडा हो गया ,
उसमे नगीने सी जड़ गई मै , अब जब -जब होती है बरसात याद आती है पानी की तरलता ,
कोमलता सहजता शीतलता ,
डरती हूँ वो पानी कहीं शीशा तो नहीं हो गया !

12 टिप्‍पणियां:

  1. अद्भुत बिम्ब रचें हैं उषा तुमने ! पूरी की पूरी भीग गई मै,मेरी स्मृतियाँ मेरा पूरा वजूद ,सावन और भी सुहाना हो गया .

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  2. usha ati sunder likha tumane pani kabhi kalpanaa tha aaj yatharth hai tumame samaya hua aur tum usamen khud ko khoj rahi ho .. bahut sunder khola khud ko tumane

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  3. Bahut sundar shabd chitr kheencha hai apane ..badhai.Hindi blog jagat men apka svagat karate huye harsh mahasoos ho raha hai.
    HemantKumar

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  4. मन की बात कहने की कोशिश। शुभकामना - लिखते रहें।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  5. pani re pani tera rang kaisa, jisme mila do lage us jaisa. narayan narayan

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  6. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  7. मेरे ब्लॉग पर आने और कमेन्ट करने का.बहुत -बहुत धन्यवाद.....
    आप सबके सहयोग से बहुत हिम्मत था बल मिलता है .........
    उम्मीद करती हूँ की आगे भी आप सबका साथ मिलेगा !!!
    पुनः आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद .....!!!
    उषा राय

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