सोमवार, 27 जुलाई 2009

आखिरी गुलाब

आखिरी गुलाब .......................
सौपती हुई तुम मेरा चेहरा देखोगी ,
युद्ध के ख़त्म होने का ऐलान .....,
दिव्यता आराम और शांति की !

मेरी आखिरी नींद देखते हुए ......,
तुम मोहित सी हो जाओगी ......!

सबको दिखाओगी..कहोगी ......,
सो रही है जैसे कभी सोई नही ..!

अर्जुन की तरह बैठ जाओगी....,
रख के सारे हथियार ..उदास ...!
आखिरी गुलाब ...................,
सौपती हुई तुम बहुत कुछ कहोगी !

जन्मते ही लडकी के इर्द गिर्द ,
जहर बाँटती पूतनाओं की बातें !

लोहे के जाल बुनते ,नर्क बनाते,
गीधों कौओं की कहानियाँ ...........

दुहराओगी अपने संकल्प ...............
जैसे ही करोगी वादा अपने आप से !

पांव तले धरती खिसक जायेगी !
देख के -सब के सब अपने ही तो हैं !


आखिरी गुलाब ........................
सौपते हुए ;तुम पुकार उठोगी !!!!!


देखो ! सहती रही है ये अनवरत ,
छलावा धोखा क्रूर उपेक्षा को ...

सीमित साधनों में जीती पर
लेती थी चुनौतियां बढ़ बढ़ के ...

कहती रहती -जल में पहुंचेगे कैसे ,
काई में नहा रहे हैं .....लोग..........

थक गई है ये !अपने युद्ध से नहीं,
अच्छे लोंगो को जगाते जगाते !

आखिरी गुलाब .....................
देते हुए तुम पोंछ लोगी स्व नयन !


जब मै नहीं रहूंगी तुम्हारे साथ ,
यादें तम्हें कमजोर नहीं होने देंगी !

ये बात उभर के आएगी बार बार ,
जीने के लिए चाहिए जीने के लिए !


पॉँच गाँव जैसे पॉँच अधिकार ...
मन बुद्धि मेहनत चुनाव फैसला !

ये मिले! तो सब मुक्त हों!!जो ,
सदियों से तपित हैं शापित हैं !


आखिरी गुलाब ..................
रखते हुए तुम रोओगी तो नही न ...........

रविवार, 19 जुलाई 2009

बरसात
बरसात के झमाझम बारिश में भीगने के बाद मै वहां जाती
; जहाँ पानी कुछ देर और रुकता पानियों को उछालना ,खिलखिलाना
,
घर आकर भूल जाना ,यही थी बरसात ! एक दिन गई तो पानी थिर था
,
गम्भीर रहस्यमय आकर्षक ,
दबे
पांव झाँका वो पानी नही मेरा चेहरा था ,
पूरी
की पूरी मै भागने को हुई , की अचानक वह फ्रेम सा खडा हो गया ,
उसमे नगीने सी जड़ गई मै , अब जब -जब होती है बरसात याद आती है पानी की तरलता ,
कोमलता सहजता शीतलता ,
डरती हूँ वो पानी कहीं शीशा तो नहीं हो गया !