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सासों में ,
यादों में,
खवाबो में,
पर्दों में,
सपनो में,
परछाई में,
पत्थरों में
तन्हाइयो में,
खुबसूरत प्यारी लगती है औरते,
सच पूछो तो केवल व्ही बची है औरते।
यादों में,
खवाबो में,
पर्दों में,
सपनो में,
परछाई में,
पत्थरों में
तन्हाइयो में,
खुबसूरत प्यारी लगती है औरते,
सच पूछो तो केवल व्ही बची है औरते।
इसी फरेब में सदियाँ गुजार दी हमनें
प्रत्युत्तर देंहटाएंगुजिस्ता साल से शायद ये साल बेहतर हो...............
इससे पहले की इस सदी की किताबबंद हो ऐसा कुछ करें की हमारे हिस्से के सफे कोरे न छूट जाएँ !!
प्रत्युत्तर देंहटाएंक्या बात है ऊषा जी. बहुत अच्छा. कृपया कमेंट बॉक्स से वर्ड वेरीफ़िकेशन हटा दें.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत मार्के की चोट
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