सोमवार, 27 अप्रैल 2009

औरते



सासों में ,
यादों में,
खवाबो में,
पर्दों में,
सपनो में,
परछाई में,
पत्थरों में
तन्हाइयो में,
खुबसूरत प्यारी लगती है औरते,
सच पूछो तो केवल व्ही बची है औरते।



तलाश


तलाश कभी मरती नही,
सदिया बीत जाने पर भी ,
किसी न किसी को बना कर पाथेय,
जीवीत रहती है,
वैसे ही जैसे
बीज कभी मरता नही
लौट लौट कर आता है ,
हरा भरा करता है धरती को
अनगिनत तलाशे जो डरी ,
सहमी और भूमीगत है ,
कभी न कभी पुरी होंगी ।
तब सोने का हीरण,
छलावा नही होगा ,
और दुनीया भर की औरते
मुस्कुरायेंगी......